अपनी कर्मिक कार्य को समझें: भाग्य मैट्रिक्स में जीवन का मुख्य पाठ और (22 आर्काना)

कर्म का विषय हमेशा उन लोगों का ध्यान खींचता रहा है जो अपनी किस्मत को समझना चाहते हैं और यह जानना चाहते हैं कि अतीत की घटनाएँ वर्तमान और भविष्य को कैसे प्रभावित करती हैं। भाग्य मैट्रिक्स व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास के सभी पहलुओं को खोलने की कुंजी है। इस लेख में हम बात करेंगे कि “मुख्य कर्मिक कार्य” क्या होता है और यह जीवन-पथ के अर्थ को समझने में कैसे मदद करता है। इसके अलावा, हम बताएँगे कि इस कार्य को कैसे निर्धारित किया जाए और आपकी कर्म के अनुसार मिलने वाले पाठों की व्याख्या भी देंगे।

Главная кармическая задача
भाग्य मैट्रिक्स के अनुसार मुख्य कर्मिक कार्य: व्याख्या

“कर्मिक कार्य” क्या है?

कर्म — हिंदू धर्म से जुड़ा एक शब्द है। इस आस्था के अनुसार माना जाता है कि मनुष्य की आत्मा पुनर्जन्म लेने में सक्षम होती है, और इस जन्म का भाग्य पिछले जन्म में किए गए कर्मों पर निर्भर करता है।

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भाग्य मैट्रिक्स के अनुसार मुख्य कर्मिक कार्य: व्याख्या

जब हम कर्मिक कार्य की व्याख्या करते हैं, तो हम जीवन के सवालों के जवाब ढूँढते हैं और आगे बढ़ते हैं। इसी वजह से आध्यात्मिकता और गूढ़ विषयों में रुचि रखने वाले लोग कर्मिक कार्यों को समझते हैं, ताकि वे खुद के साथ सामंजस्य में रह सकें।

मुख्य कर्मिक कार्य कैसे पता करें?

सबसे पहले भाग्य मैट्रिक्स की गणना करना ज़रूरी है। यह आप हमारे मुफ्त भाग्य मैट्रिक्स कैलकुलेटर की मदद से कर सकते हैं। सभी कर्मिक कार्य “कर्मिक पूँछ” (कर्मिक टेल) में एकत्र होते हैं, लेकिन हमें मुख्य कार्य में रुचि है:

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भाग्य मैट्रिक्स के अनुसार मुख्य कर्मिक कार्य: व्याख्या

यही आपको बताएगा कि इस जीवन में आपको अतीत से कौन-सा मुख्य पाठ सीखना है।

व्याख्या:

  • 3-सम्राज्ञी: माँ के साथ संबंध सुधारना, स्त्री-गुणों को “मजबूत” करना।
  • 4-सम्राट: पिता के साथ संबंध सुधारना, जिम्मेदारी लेने से न डरना।
  • 5-हाइरोफैंट: नए का विरोध न करना, लोगों को उपदेश न देना और उन्हें फैसले लेने की स्वतंत्रता देना।
  • 6-प्रेमी: दूसरों की राय पर निर्भर न होना और खुद से प्रेम करना।
  • 7-रथ: “पर्यावरण-संतुलित” नेतृत्व सीखना, लक्ष्य तय करना और उन्हें हासिल करना।
  • 8-न्याय: बदले की भावना और “दुनिया न्यायपूर्ण नहीं है” से उपजी चिड़चिड़ाहट को छोड़ना, जिम्मेदार बनना।
  • 9-संन्यासी: दुनिया के लिए खुलना, लोगों पर भरोसा करना और ज्ञान साझा करना सीखना।
  • 10-भाग्य का पहिया: जीवन का आनंद लेना सीखना, रिलैक्स करना, किस्मत पर भरोसा करना — लेकिन आलसी न बनना।
  • 11-शक्ति: अपनी ऊर्जा को संतुलित तरीके से काम और खेल में लगाना, खुद को आराम की अनुमति देना।
  • 12-लटका हुआ व्यक्ति
  • 13-मृत्यु: नए की ओर साहस से बढ़ना, लेकिन कामों को बीच में न छोड़ना।
  • 14-संयम: सामंजस्य पाने के लिए खुद पर, अपनी आत्मा और अंतर्ज्ञान पर भरोसा करना सीखना।
  • 15-शैतान: शत्रुतापूर्ण रवैया छोड़ना और अपनी निर्भरताओं पर नियंत्रण रखना सीखना।
  • 16-मीनार: पुराने को विदा कहना और खुले दिल से हर नए को स्वीकार करना सीखना।
  • 17-तारा: अपने प्रतिभा पर विश्वास करना और दूसरों की सफलता से ईर्ष्या न करना।
  • 18-चंद्रमा: अंतर्ज्ञान विकसित करना, रचनात्मकता या गूढ़ विद्या में लगना — लेकिन काली जादू में नहीं।
  • 19-सूर्य: संचार क्षमताओं को विकसित करना और ऊर्जा का मार्गदर्शक बनने की भूमिका निभाना।
  • 20-न्याय-निर्णय: परिवार के साथ संबंधों पर काम करना, उनसे अलग होना — लेकिन साथ ही संबंधों को सामंजस्यपूर्ण बनाए रखना।
  • 21-विश्व: इस दुनिया और इसमें रहने वाले लोगों के लिए भलाई लाना, उदाहरण के लिए, स्वयंसेवा करना।
  • 22-मूर्ख: वित्त और रिश्तों में स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता हासिल करना।

निष्कर्ष

भाग्य मैट्रिक्स की मदद से आप जान सकते हैं कि पिछले जन्मों में किए गए कर्मों के आधार पर जीवन आपको कौन-से पाठ सिखाएगा।

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भाग्य मैट्रिक्स के अनुसार मुख्य कर्मिक कार्य: व्याख्या

मुख्य कर्मिक कार्य जानने के लिए हमारे मुफ्त ऑनलाइन-कैलकुलेटर का उपयोग करें और ऊपर दी गई व्याख्या पढ़ें।